
मुंगेली, कुणाल सिंह ठाकुर। खाद्य सुरक्षा कानून, शासन के नियम और गरीबों के हक़ की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाते एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शासकीय शिक्षिका ने कथित रूप से कूट रचित दस्तावेज, स्वघोषणा पत्र और शपथ पत्र के माध्यम से बीपीएल राशन कार्ड बनवाकर करीब 5 वर्षों तक गरीबों का राशन हड़पती रही और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे रहे।जानकारी के अनुसार, ग्राम दामापुर (प्र.), आश्रित ग्राम पातालकुंडी, जनपद/ब्लॉक मुंगेली, जिला मुंगेली निवासी चंद्रकली बंजारा, पति अमरदास बंजारा जो शासकीय शिक्षिका हैं के नाम पर बीपीएल राशन कार्ड क्रमांक 226477161350 जारी किया गया।

उक्त कार्ड से दुकान आईडी क्रमांक 632005126 जय माता दी महिला स्व-सहायता समूह, दामापुर (प्र.) के माध्यम से लगातार लगभग 5 वर्षों तक बीपीएल श्रेणी का चावल आहरित किया गया।
नियम साफ़—फिर भी खुली लूट!
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय कर्मचारी एवं उनके परिवार बीपीएल/एनएफएसए के पात्र नहीं होते, इसके बावजूद यह कार्ड कैसे बना?
किन दस्तावेजों के आधार पर बना?
और सबसे बड़ा सवाल—इतने वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा?
यह मामला न केवल खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, विभागीय मिलीभगत और संभावित राजनीतिक संरक्षण की ओर भी इशारा करता है।
पति पर आरोप, रिश्तेदार मैदान में, राजनीति की आड़?
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राशन कार्ड की मुखिया ने अपने ही पति पर जबरन कार्ड बनवाने का आरोप लगा दिया। वहीं दूसरी ओर, खुद को शिक्षिका का रिश्तेदार बताने वाला एक व्यक्ति, जो स्वयं को कांग्रेस नेता भी बताता फिर रहा है खुलेआम मामले को दबाने और प्रभाव डालने की कोशिश करता नजर आ रहा है।अब सवाल यह है कि क्या राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई रोकी जा रही है?क्या गरीबों का राशन डकारना अब सत्ता-संरक्षण में जायज़ हो गया है?
शिक्षा विभाग और खाद्य विभाग की चुप्पी कटघरे मेंयदि शिक्षिका शासकीय सेवा में हैं, तो—शिक्षा विभाग ने आय सत्यापन क्यों नहीं किया?
खाद्य विभाग ने पात्रता की जांच क्यों नहीं की?पंचायत, जनपद और जिला स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें क्यों मूंद रखीं?
यह चुप्पी अब संदेह को और गहरा कर रही है।अब उठ रहे हैं तीखे सवालक्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगा?
क्या वर्षों का ग़लत तरीके से लिया गया चावल रिकवर होगा?
क्या दोषी शिक्षिका पर धोखाधड़ी और कूट रचना के तहत एफआईआर व विभागीय कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी बीजेपी सरकार के कार्यकाल में फाइलों के ढेर में दबा दिया जाएगा?
