मुंगेली, कुणाल सिंह ठाकुर। अचानकमार टाइगर रिज़र्व से एक अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने वन्यप्राणी संरक्षण से जुड़े अधिकारियों और आमजन दोनों को स्तब्ध कर दिया है। 25 जनवरी 2026 को रिज़र्व क्षेत्र अंतर्गत सारसडोल परिक्षेत्र के कुटेरापानी कक्ष क्रमांक 120 आर.एफ. में एसटीपीएफ (स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स) द्वारा की जा रही नियमित पेट्रोलिंग के दौरान एक नर बाघ मृत अवस्था में पाया गया।बाघ के शव की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को सुरक्षित किया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा निर्धारित मानक कार्यप्रणाली (SOP) के अनुरूप आगे की कार्रवाई की गई।एनटीसीए एसओपी के तहत हुआ पोस्टमार्टमएनटीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार गठित शव परीक्षण समिति की उपस्थिति में 26 जनवरी 2026 को पशु चिकित्सकों की विशेष टीम द्वारा मृत बाघ का विधिवत पोस्टमार्टम किया गया। शव विच्छेदन पंचनामा के दौरान यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि बाघ के दांत, नख, पंजे सहित सभी अंग पूर्णतः सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे किसी भी प्रकार के शिकार या अवैध गतिविधि की संभावना से इनकार किया गया।

दो बाघों के बीच संघर्ष बना मौत का कारण जांच एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृत नर बाघ की मौत दो बाघों के आपसी संघर्ष के कारण हुई। संघर्ष के दौरान मृत बाघ की गर्दन की हड्डी टूट गई, वहीं गर्दन के निचले हिस्से में दूसरे नर बाघ के दांतों के स्पष्ट निशान पाए गए। यह संकेत करता है कि दोनों बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर गंभीर संघर्ष हुआ।संघर्ष के कई भौतिक प्रमाण मिलेजिस स्थान पर बाघ का शव मिला, वहां संघर्ष के अनेक प्रत्यक्ष संकेत पाए गए। इनमें पेड़ों की टूटी हुई डालियां, बाघ का मल, खरोंच के निशान और बालों की मौजूदगी शामिल है। इसके अलावा मृत बाघ के पंजों और नखों में दूसरे बाघ के बाल भी मिले, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि दोनों बाघों के बीच तीव्र संघर्ष हुआ था।

मृत बाघ की उम्र लगभग दो वर्ष,अधिकारियों ने बताया कि मृत बाघ की उम्र लगभग दो वर्ष थी। कम उम्र के बाघों में क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर संघर्ष की घटनाएं प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा मानी जाती हैं, हालांकि इस प्रकार की मृत्यु वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से चिंताजनक है।दूसरे बाघ की पहचान, लगातार निगरानीघटना में शामिल दूसरे नर बाघ की पहचान कर ली गई है। वन विभाग द्वारा उसे कैमरा ट्रैप और फील्ड ट्रैकिंग के माध्यम से लगातार ट्रैक किया जा रहा है, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।आंतरिक अंग लैब जांच हेतु सुरक्षितएनटीसीए द्वारा निर्धारित एसओपी के पालन में पोस्टमार्टम के दौरान मृत बाघ के आंतरिक अंगों को सुरक्षित कर प्रयोगशाला परीक्षण हेतु भेजने की प्रक्रिया भी अपनाई गई, ताकि मृत्यु के सभी पहलुओं की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके।विधिवत हुआ शव दहन

पोस्टमार्टम के उपरांत सक्षम अधिकारियों, शव परीक्षण समिति एवं पशु चिकित्सकों की उपस्थिति में मृत बाघ का विधिवत शव दहन किया गया।कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूदइस पूरी कार्रवाई के दौरान एनटीसीए प्रतिनिधि उपेन्द्र दुबे, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक के प्रतिनिधि एवं एनजीओ सदस्य मंजूर खान, कानन पेंडारी के पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं मुंगेली डॉ. आर.एम. त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित पशु चिकित्सक दल, मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र संचालक अचानकमार टाइगर रिज़र्व अभिषेक कुमार सिंह, उप संचालक गणेश यू.आर., सहायक संचालक को. संजय लुथर, सहायक संचालक बफर समीर जोनाथन सहित संबंधित परिक्षेत्र अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।पीसीसीएफ (वन्यप्राणी) द्वारा अनुमोदितयह संपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा अनुमोदित की गई है।अचानकमार टाइगर रिज़र्व में हुई यह घटना एक ओर जहां वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर बाघ संरक्षण और निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी जोर देती है।

By Kunaal Singh Thakur

KUNAL SINGH THAKUR HEAD (प्रधान संपादक)

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