
छत्तीसगढ़, द मीडिया पॉइंट। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने चर्चित कोयला लेवी घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि आर्थिक अपराध बेहद गंभीर होते हैं ऐसे मामलों में जमानत देने से पहले विशेष सावधानी जरूरी है।यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा दर्ज अपराध से जुड़ा है। इसमें आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया था कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के नाम पर अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क चल रहा था।जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच इस सिंडिकेट द्वारा करीब 540 करोड़ रुपये की उगाही का अनुमान है।
इस मामले में कई अधिकारी, कारोबारी और अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, देवेंद्र डडसेना इस पूरे नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। उस पर रकम की वसूली और उसके बंटवारे में शामिल होने का आरोप है। जब्त डायरी और गवाहों के बयानों में करीब 52 करोड़ रुपये के लेनदेन का जिक्र भी सामने आया है।आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं, सिर्फ सह-आरोपियों के बयान हैं। वहीं, राज्य पक्ष ने कहा कि मामला गंभीर है, आरोपी की भूमिका सक्रिय रही है और जांच अभी जारी है। साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई।दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
