
बिलासपुर, द मीडिया पॉइंट। मोटर दुर्घटना दावा मामलों में हाईकोर्ट ने पीड़ितों के हित में एक अहम और राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन में देरी होने के आधार पर किसी भी क्लेम को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि तकनीकी कारणों की वजह से पीड़ित परिवारों को न्याय से वंचित करना उचित नहीं है। इस फैसले से उन सैकड़ों परिवारों को राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश तय समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे।
दरअसल, कई बीमा कंपनियों और वाहन मालिकों ने 40 से ज्यादा सिविल रिवीजन याचिकाएं दायर कर यह दलील दी थी कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 (3) के तहत समय सीमा खत्म होने के बाद ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं है।हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मामलों की सुनवाई मेरिट के आधार पर होनी चाहिए, न कि केवल समय सीमा जैसे तकनीकी आधार पर।हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां और आवेदक सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के फैसले को ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे।हाईकोर्ट ने सभी मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल्स को निर्देश दिए हैं कि वे इन मामलों की सुनवाई जारी रखें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक ट्रिब्यूनल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगे।
