रायपुर, द मीडिया पॉइंट। आगामी मानसून को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों को अलर्ट कर दिया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बारिश से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि जलभराव, बाढ़ और संक्रामक बीमारियों जैसी समस्याओं से समय रहते निपटा जा सके।

विभाग द्वारा जारी परिपत्र में नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को नाले-नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की ठोस तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बारिश के दौरान फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने हाल ही में 20 और 21 अप्रैल को आयोजित समीक्षा बैठक में साफ तौर पर निर्देश दिए थे कि 31 मई तक बड़े नालों, नालियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई हर हाल में पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान शहरों में जलभराव की समस्या किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी आवश्यक उपाय समय रहते किए जाएं।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम विभिन्न नगरीय निकायों का निरीक्षण करेगी। यदि कहीं भी लापरवाही या कार्य में कमी पाई गई, तो संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने परिपत्र में यह भी उल्लेख किया है कि हर साल समय पर नालियों की सफाई नहीं होने और जल निकासी मार्गों में अवरोध बने रहने के कारण अचानक बारिश में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए सभी निकायों को पहले से ही तैयार रहने को कहा गया है।निर्देशों के तहत शहरों के मुख्य मार्गों, गलियों और चौराहों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही सभी नाले और नालियों को अंतिम छोर तक गहराई से साफ करने, उनमें जमा गाद और कचरे को हटाने और पानी के बहाव को सुचारू बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा, निर्माणाधीन नालों में पड़ी सामग्री को हटाने, जल निकासी मार्ग में बने कच्चे-पक्के अतिक्रमणों को समाप्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी जलस्रोत जैसे नदी या तालाब में गंदगी न पहुंचे।बाढ़ प्रबंधन को लेकर भी विभाग ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी निकायों को बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने, आवश्यक स्टाफ, उपकरण और मशीनरी उपलब्ध रखने तथा नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इन नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने और उनके संपर्क नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया है।

इसके साथ ही निचली बस्तियों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में तत्काल राहत दी जा सके।विभाग ने यह भी कहा है कि बाढ़ की स्थिति में प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही बाढ़ के दौरान और उसके बाद संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है।

बरसात से पहले शहरों में लगे पुराने या जर्जर साइनबोर्ड, विज्ञापन होर्डिंग, बिजली के तार, हाईटेंशन लाइन से जुड़े जोखिमपूर्ण तत्वों को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि तेज हवा और बारिश के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।कुल मिलाकर, विभाग ने साफ कर दिया है कि इस बार बरसात से पहले सभी तैयारियां पूरी तरह से पुख्ता की जाएंगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का फोकस इस बार ‘पूर्व तैयारी, बेहतर प्रबंधन और त्वरित राहत’ पर है, ताकि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

By Kunaal Singh Thakur

KUNAL SINGH THAKUR HEAD (प्रधान संपादक)

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