
मुंगेली, कुणाल सिंह ठाकुर। ‘कविता चौराहे पर’ साहित्य मंच मुंगेली ने अपने स्थापना के 21 गौरवशाली वर्ष पूरे होने पर रविवार को सियान सदन (वृद्धाश्रम) रामगढ़ में भव्य गरिमामयी समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें एक ओर जहां राष्ट्र रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीद के परिजनों व वरिष्ठ साहित्यकार को सम्मानित कर कृतज्ञता ज्ञापित की गई, वहीं दूसरी ओर प्रदेश भर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से साहित्य की रसधार बहाई।समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों ने ‘कविता पोस्टर प्रदर्शनी’ का फीता काटकर विमोचन किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रांतीय सचिव (वरिष्ट नागरिक संघ) धनेश कुमार सोलंकी उपस्थित रहे। मंच पर कविता चौराहे पर के संरक्षक जेठमल कोटड़िया, मनोज अग्रवाल, डॉ. चंद्रशेखर सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद पाठक बतौर अतिथि मंचासीन रहे।*साहित्य की सेवा में ‘कविता चौराहे पर’ के 21 वर्ष: शून्य से शिखर तक का सफर* ‘कविता चौराहे पर’ साहित्य मंच के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर संस्था के सह-संयोजक जगदीश प्रसाद देवांगन ने मंच के दो दशकों के संघर्ष और सफलता का यात्रा वृत्तांत प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी शुरुआत आज एक वटवृक्ष बन चुकी है।यात्रा वृत्तांत प्रस्तुत करते हुए देवांगन ने बताया कि इस मंच की नींव वर्ष 2005 में राकेश गुप्त ‘निर्मल’ द्वारा रखी गई थी। ‘एकला चलो रे’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए उन्होंने स्वयं के व्यय से एक श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) और चाक खरीदा और पुराने बस स्टैंड के चौराहे पर अपनी रचनाएं लिखकर साहित्य की सरिता प्रवाहित की। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और यह एक कारवां बन गया।उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि आज यह मंच केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों के स्थापित एवं उभरते साहित्यकारों की रचनाओं को भी स्थान दे रहा है। अब तक इस मंच से 524 अंक प्रसारित हो चुके हैं और 525वां अंक ‘आंग्ल नववर्ष विशेषांक’ के रूप में युवा रचनाकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी की रचना के साथ जारी किया गया है।कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन करते हुए युवा साहित्यकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने उपस्थित अतिथियों और श्रोताओं को मुंगेली के समृद्ध साहित्यिक इतिहास से अवगत कराया। उन्होंने बड़े गर्व के साथ साझा किया कि मुंगेली के कवि सम्मेलनों में पद्मभूषण गोपाल दास नीरज, हास्य सम्राट काका हाथरसी, संतोष आनंद, बृजेन्द्र अवस्थी, सुरेश अवस्थी, एकता शबनम, बरखा रानी, विकल साकेती, प्रभा ठाकुर, नंदू लाल चोटिया और जेमनी हरियाणवी जैसे देश के ख्यातिलब्ध और प्रतिष्ठित कवि अपनी काव्य गरिमा बिखेर चुके हैं। इन महान विभूतियों की उपस्थिति ने मुंगेली को साहित्य के मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।

कार्यक्रम में ‘अमर शहीद’ राजकमल कश्यप (प्लाटून कमांडर, 15वीं वाहिनी) के माता श्रीमती चंद्रिका कश्यप एवं पिता राधेश्याम कश्यप को ‘अमर बलिदान स्मृति सम्मान’ से नवाजा गया। उन्हें भारत माता का छायाचित्र भेंट कर उनकी वीरता को नमन किया गया। शहीद राजकमल ने साल 2013 में दीपावली की रात राष्ट्र की सुरक्षा के लिए शहादत का दीपक प्रज्वलित किया था। इसके साथ ही, वरिष्ठ साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के संरक्षक श्री बुधराम यादव को उनकी छह दशकों की अनवरत साहित्य सेवा और ‘अंचरा के मया’ जैसी कालजयी कृतियों के लिए ‘हिंदी साहित्य सेवी सम्मान’ से विभूषित किया गया।संरक्षक डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने अपने उद्बोधन में ‘नवगीत और नई कविता’ पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए साहित्य की वर्तमान दिशा पर चर्चा की। मुख्य अतिथि धनेश कुमार सोलंकी ने भी संस्था के प्रयासों की सराहना की। अतिथियों ने विशेष रूप से शहीद परिवार के सम्मान को एक अनुकरणीय पहल बताया।समारोह में उस समय वातावरण और भी गरिमामयी हो गया, जब छत्तीसगढ़ी साहित्य के अनमोल रत्न बुधराम यादव ने मुंगेली की साहित्यिक विरासत की प्रशंसा करते हुए अपना आभार प्रकट किया।सम्मान ग्रहण करने के पश्चात अपने आशीर्वचन में बुधराम यादव जी ने कहा कि मुंगेली की धरती हमेशा से साहित्य और कला की पोषक रही है। उन्होंने ‘कविता चौराहे पर’ संस्था के 21 वर्षों के अनवरत सफर की सराहना करते हुए कहा कि, “किसी साहित्यिक संस्था का दो दशकों तक बिना रुके साहित्य की मशाल जलाए रखना एक बड़ी तपस्या है।” उन्होंने इस सम्मान के लिए संस्था का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी लेखनी को और अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने मुंगेली के साहित्य प्रेमियों और युवाओं की सक्रियता को छत्तीसगढ़ी साहित्य के सुनहरे भविष्य का संकेत बताया।प्रथम सत्र का कुशल संचालन युवा साहित्यकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने किया और आभार प्रदर्शन संस्थापक राकेश गुप्त ‘निर्मल’ द्वारा किया गया।स्वल्पाहार के पश्चात द्वितीय सत्र का आगाज हुआ, जिसका संचालन रामा साहू ‘संयम’ ने किया। इस सत्र में बिलासपुर, बेमेतरा, दुर्ग, रायपुर, कवर्धा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, महेंद्रगढ़ और कोरबा सहित स्थानीय कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम अध्यक्ष विजय तिवारी (उसलापुर) ने सुमधुर गीत व दोहों की प्रस्तुति दी। उन्होंने मंच के विस्तार हेतु ‘स्मारिका’ प्रकाशन में सहयोग की घोषणा की। मुख्य अतिथि बीरेंद्र श्रीवास्तव ने संस्थापक राकेश गुप्त निर्मल के गृहग्राम और कार्यक्षेत्र को लेकर चुटकी लेते हुए कहा कि ‘काश! राकेश गुप्त निर्मल ने यह संस्था मनेंद्रगढ़ में बनाई होती’, उन्होंने संस्था की निरंतरता की जमकर तारीफ की। विशिष्ट अतिथि सईद खान ने बच्चों की उपलब्धियों को बड़ी जीत बताया।कार्यक्रम को सफल बनाने में संरक्षक राजकुमार शुक्ला, बी.पी. तिवारी, कमल सोनी सहित सियान सदन के वरिष्ठ नागरिक मानिकपुरी, भास्कर और टंडन जी का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम की सफलता का मुख्य श्रेय उन समर्पित आयोजकों को जाता है जिन्होंने दिन-रात एक कर इस साहित्यिक महाकुंभ को साकार किया। आयोजन टीम में ज्वाला प्रसाद कश्यप, रामा साहू, हेमंत कश्यप,अमीर चतुर्वेदी, कमल सोनी, रामेश्वर राव, मोहन उपाध्याय, खेमेश्वर पुरी गोस्वामी, कृष्ण कुमार तिवारी, विजेंद्र जायसवाल, राजू देवांगन, खिलेंद्र मिरे, देव गोस्वामी एवं संतोष वैष्णव, रिंकेश गुप्ता जैसे ऊर्जावान साथी शामिल रहे।अतिथियों ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन साथियों के सहयोग और सामंजस्य के बिना इतना व्यवस्थित कार्यक्रम संभव नहीं था। प्रत्येक सदस्य ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी लगन के साथ किया, जिससे दूर-दराज से आए कवियों और अतिथियों को मुंगेली की आतिथ्य सत्कार की परंपरा का अनुभव हुआ।द्वितीय सत्र का आभार प्रदर्शन खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद रायसागर, रजनीश कुमार, योगेश साहू सहित भारी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
