
छत्तीसगढ़, द मीडिया पॉइंट। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर शुक्रवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इस ऑपरेशन में अब तक तीन नक्सलियों के मारे जाने की खबर सामने आई है। वहीं मुठभेड़ के दौरान एक जवान शहीद हो गया, जबकि एक अन्य जवान घायल हो गया है, जिसे एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया है।सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों को एक एके-47 और एक इंसास राइफल भी बरामद हुई है।
हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि जवानों ने नक्सलियों को चारों तरफ से घेर रखा है और इलाके में लगातार फायरिंग जारी है।जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दस्ता सी-60 ने अबूझमाड़ के दुर्गम इलाके में सर्चिंग और डोमिनेशन ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक सूचना मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की। फिलहाल पूरे क्षेत्र में नक्सल विरोधी ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
ऑपरेशन समाप्त होने के बाद विस्तृत जानकारी जारी की जाएगी।इससे पहले गुरुवार को बीजापुर जिले में हुई मुठभेड़ में नक्सली कमांडर उधम सिंह मारा गया था। वहीं 46 लाख रुपए के इनामी 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें आठ महिला नक्सली भी शामिल थीं। ये सभी माओवादी संगठन के साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े हुए थे। इन्होंने बस्तर पुलिस की ‘पूना मर्जेम’ पुनर्वास योजना के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सरेंडर किया।
आत्मसमर्पण करने वालों में सोमडू मड़काम (42), हुंगी कुंजाम (19) और पायकी कुंजाम (22) सहित कई सक्रिय नक्सली शामिल हैं, जिन पर लाखों रुपए का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पुलिस को एक एके-47 रायफल, दो एसएलआर, 250 जिलेटिन स्टिक, 400 डेटोनेटर, बारूद से भरा प्लास्टिक ड्रम और कॉर्डेक्स वायर का बंडल भी सौंपा।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी और सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, बीजापुर जिले में 1 जनवरी 2024 से अब तक 888 नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। वहीं 1,163 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं और अलग-अलग मुठभेड़ों में 231 नक्सली मारे गए हैं। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि लगातार चल रहे अभियानों, सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क संपर्क में सुधार और विकास योजनाओं के विस्तार से माओवादी संगठन का प्रभाव क्षेत्र तेजी से सिमट रहा है।
