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छत्तीसगढ़, द मीडिया पॉइंट। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म के आरोपी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। खास बात यह रही कि इस मामले में मूक-बधिर पीड़िता ने अपनी बात इशारों और प्लास्टिक की गुड़िया के जरिए अदालत के सामने रखी जिसे कोर्ट ने पूरी गंभीरता से स्वीकार किया।

ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बोलने और सुनने में असमर्थ होने के बावजूद दुभाषिए की मदद से अपनी आपबीती बताई। प्लास्टिक की गुड़िया के जरिए उसने घटना को समझाया, जिसे अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के साथ पीड़िता की गवाही को आधार बनाकर आरोपी को दोषी करार दिया गया।

आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की, लेकिन चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि मूक-बधिर व्यक्ति की गवाही भी पूरी तरह मान्य होती है, अगर वह विश्वसनीय और सुसंगत हो।

यह मामला साल 2020 का है, जब बालोद जिले में एक मूक-बधिर युवती के साथ उसके ही परिचित ने दुष्कर्म किया था। घटना के समय पीड़िता घर में अकेली थी। बाद में उसने इशारों के जरिए परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। इस फैसले को न्याय व्यवस्था में संवेदनशीलता और पीड़ितों के अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

By Kunaal Singh Thakur

KUNAL SINGH THAKUR HEAD (प्रधान संपादक)

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