
मुंगेली, कुणाल सिंह ठाकुर। लोरमी ब्लॉक से प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां दो बुजुर्ग महिलाओं को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। इस गलती की वजह से उनका नाम राशन कार्ड और पेंशन सूची से हटा दिया गया है जिससे महिलाओं को मिलने वाले बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। खुड़िया वन क्षेत्र के पथर्री गांव की रहने वाली 70 वर्षीय बैगा आदिवासी महिला सहबीन बैगा और सूरजा बाई को पिछले चार महीनों से राशन नहीं मिल रहा है। सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण राशन दुकान से उन्हें चावल देने से सख्त मना कर दिया गया है।राशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर सहबीन बैगा बीते तीन-चार महीनों से अपने नाम को पुनः दर्ज कराने के लिए पंचायत से लेकर सरकारी कार्यालयों तक चक्कर काट रही हैं। उन्होंने इस समस्या की जानकारी सरपंच, सचिव और राशन दुकानदार से साझा की, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। राशन न मिलने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति बन गई और हालात ऐसे हो गए कि उन्हें भीख मांगकर अपना जीवन यापन गुजारना पड़ रहा है। यह मामला को मीडिया के द्वारा सामने लाने के बाद प्रशासन हरकत में आया। कांग्रेस नेता विद्यानंद चंद्राकर के हस्तक्षेप के बाद आनन-फानन में पीड़ित महिला को दो बोरी चावल और नमक उपलब्ध कराया गया।
अब देखनी वाली बात यह होगी कि ख़बर प्रकाशित होने के बाद उच्च अधिकारी के द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर महिलाओं को उनका हक दिला पा रहा है या नहीं, यह देखनी वाली बात होगी।
