
मुंगेली, कुणाल सिंह ठाकुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर मुंगेली में कांग्रेस पार्टी द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। सीमित संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और कमजोर जनसमर्थन के कारण कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल औपचारिकता और खानापूर्ति तक सिमट कर रह गया।कांग्रेस द्वारा मनरेगा और धान खरीदी को लेकर लगाए गए आरोपों को स्थानीय किसानों और मजदूरों ने सिरे से नकार दिया। आमजन का कहना है कि प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार किसान, मजदूर और गरीब वर्ग के हित में ठोस निर्णय ले रही है, जिससे विपक्ष बौखलाहट में इस तरह के प्रदर्शन कर रहा है।
भाजपा सरकार द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। रकबा निर्धारण और खरीदी प्रक्रिया में सख्ती का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और वास्तविक किसानों को लाभ पहुंचाना है, न कि किसी को नुकसान पहुँचाना। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कांग्रेस अपने कार्यकाल में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पाई, जबकि भाजपा सरकार ने समय पर भुगतान, ऑनलाइन व्यवस्था और निगरानी तंत्र को मजबूत किया है।
मनरेगा में किए गए सुधार भी योजना को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में हैं। कांग्रेस का यह प्रदर्शन न तो जनभावनाओं से जुड़ा नजर आया और न ही उसे आम जनता का समर्थन मिला। सड़कों पर उतरी कांग्रेस को देखकर यह साफ प्रतीत हुआ कि पार्टी वास्तविक मुद्दों के अभाव में केवल राजनीतिक अस्तित्व बचाने का प्रयास कर रही है।जनता का स्पष्ट मत है कि प्रदेश में भाजपा सरकार के नेतृत्व में विकास, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में कार्य हो रहा है, और ऐसे दिखावटी आंदोलनों से सरकार के जनहितकारी कदमों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।
