राजिम मेले में अव्यवस्था का अंबार: संतों और कलाकारों की उपेक्षा पर बिफरे भाजपा विधायक, अपनी ही सरकार को घेरा
राजिम: छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में आयोजित ‘राजिम कुंभ कल्प’ मेले में भारी अव्यवस्था का मामला सामने आया है। इस पावन आयोजन में पहुंचे साधु-संतों, दूर-दराज से आए कलाकारों और जनप्रतिनिधियों को बुनियादी सुविधाओं—भोजन, पानी और सम्मान—के लिए तरसना पड़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि भाजपा विधायक रोहित साहू ने स्वयं अपनी सरकार के प्रबंधन की पोल खोलते हुए कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
विधायक ने जताई नाराजगी: “नहीं मिला सम्मान”
राजिम से भाजपा विधायक रोहित साहू ने मेले के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोजन में अव्यवस्था की पराकाष्ठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में आए अतिथियों, संतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब सरकार के अपने प्रतिनिधियों और पूज्य संतों को सम्मान नहीं मिल पा रहा है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु: क्या रही अव्यवस्था?
भोजन-पानी का अभाव: कार्यक्रम में शामिल होने आए कलाकारों और अतिथियों के लिए उचित खान-पान की व्यवस्था नदारद रही।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, जिससे कई वरिष्ठ अतिथियों को अपमानित महसूस करना पड़ा।
अधिकारियों की लापरवाही: विधायक रोहित साहू ने प्रशासनिक अधिकारियों के अड़ियल रवैये को इस दुर्दशा का मुख्य कारण बताया है।
विपक्ष का हमला: “धर्म के नाम पर राजनीति की असलियत”
इस घटना के बाद विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जो पार्टी धर्म और संस्कृति के नाम पर राजनीति करती है, उसके शासनकाल में सबसे पवित्र मेलों में से एक ‘राजिम कुंभ’ में संतों का अनादर हो रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता करार देते हुए ‘दिखावे की राजनीति’ बताया है।
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
विधायक द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और मेले के शेष दिनों के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष: राजिम मेला छत्तीसगढ़ की अस्मिता का प्रतीक है। ऐसे में भाजपा विधायक के ये तीखे तेवर सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय हैं कि आखिर लाखों के बजट के बावजूद प्रबंधन के स्तर पर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
